शासकीय होलकर विज्ञान महाविद्यालय, इंदौर में दिनांक 07 नवम्बर 2025 को ‘रमन प्रभाव’ पर एक विशेष व्याख्यान एवं मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की सहायक प्राध्यापक परीक्षा-2022 में विभिन्न विषयों में चयनित पूर्व विद्यार्थियों के सम्मान कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य उद्देश्य-डॉ. सी. वी. रमन के योगदान को नई पीढ़ी के समक्ष प्रस्तुत करना, विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच एवं अनुसंधान की भावना को प्रोत्साहित करना, परमाणु ऊर्जा विभाग के विभिन्न संस्थानों में विधार्थियों हेतु विभिन्न आयाम, आदि प्रमुख थे।
यह कार्यक्रम विज्ञान भारती, इंदौर महानगर के संयुक्त तत्वाधान में संपन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता-देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर के कुलगुरु प्रो. (डॉ.) राकेश सिंघाई ने की तथा मुख्यवक्ता के रूप में श्री शंकर वी. नाखे, पूर्व निदेशक, राजा रामन्ना प्रगत प्रौद्योगिकी केन्द्र, इंदौर उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. (मेजर) अनामिका जैन ने कार्यक्रम में उपस्थित मुख्य अतिथियों, अध्यक्ष, एवं विशिष्ट अतिथियों का स्वागत किया।
कार्यक्रम में श्री केशव आशीष, संगठन मंत्री, इंदौर महानगर विभाग ने विज्ञान भारती का परिचय दिया एवं विज्ञान भारती के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला। साथ ही विज्ञान भारती के अगले कार्यक्रम में सभी को सदर आमंत्रित किया। उन्होंने भौतिक वैज्ञानिक डॉ रमन से प्रेरणा लेकर शोध के क्षेत्र में देश के लिए कार्य करने को कहा। कार्यक्रम में डॉ. आर.सी. दीक्षित-अतिरिक्त संचालक, उच्च शिक्षा, इंदौर संभाग, डॉ. एम.एम.पी. श्रीवास्तव, अध्यक्ष-शासी निकाय, डॉ. दिनेश खण्डेवाल, अध्यक्ष-जनभागीदारी समिति, विभागाध्यक्षगण, प्राध्यापकगण, पूर्व विद्यार्थी एवं विद्यार्थी आदि सम्मलित हुए। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इन्दौर के कुलगुरु-डॉ. राकेश सिंघाई ने अपने उद्बोधन में डॉ. रमन के आत्मविश्वास और उनके वैज्ञानिक दृष्टिकोण की चर्चा की। उन्होंने कहा कि रमन प्रभाव भारतीय वैज्ञानिक समुदाय के लिए प्रेरणास्रोत है और इससे यह सिद्ध होता है कि भारतीय प्रतिभा विश्व स्तर पर हमेशा ही अग्रणी रही है। डॉ. एम.एम.पी. श्रीवास्तव ने बताया कि डाॅ. रमन ने अंग्रेजों के शासन में दी जाने वाली सहायता राशि को स्वीकार न करके स्वयं के खर्चे पर नोबेल प्राईस लेने के लिए यूरोप की यात्रा किया। मुख्यवक्ता-श्री शंकर विनायक नाखे जी ने नोबेल पुरस्कार विजेता भारतीय वैज्ञानिक डॉ. सी.वी. रमन के वैज्ञानिक योगदान पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि डॉ. रमन ने वर्ष 1920 के दशक में यह शोध प्रारंभ किया, जिसमें उन्होंने प्रकाश के प्रकीर्णन पर अध्ययन किया। वर्ष 1928 में उन्होंने ‘रमन प्रभाव’ की खोज की, जो यह दर्शाता है कि जब प्रकाश किसी पदार्थ से गुजरता है, तो उसमें ऊर्जा का सूक्ष्म परिवर्तन होता है। 1940 के दशक में रमन ने इस प्रभाव के ठोस, द्रव एवं गैसों में अनुप्रयोगों पर शोध किया, जिसने पदार्थ की संरचना और आणविक स्पेक्ट्रोस्कोपी के क्षेत्र में नई दिशा प्रदान की। 1960 के दशक में ‘लेजर तकनीक’ के विकास के बाद रमन प्रभाव का उपयोग आणविक संरचना विश्लेषण, चिकित्सा, भौतिकी एवं रासायनिक अनुसंधान में अत्यधिक बढ़ गया। मुख्यवक्ता ने बताया कि डाॅ. रमन जी को उनकी इस विलक्षण खोज के लिए वर्ष 1930 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया। इस खोज की स्मृति में प्रतिवर्ष 28 फरवरी को ‘राष्ट्रीय विज्ञान दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विषयों में मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग की सहायक प्राध्यापक परीक्षा-2022 में चयनित पूर्व विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। प्राचार्य-डॉ. (मेजर) अनामिका जैन ने उन्हें शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि होलकर कॉलेज सदैव प्रतिभाओं का केंद्र रहा है और ऐसे छात्र संस्था का गौरव बढ़ाते हैं। कार्यक्रम में उप-प्राचार्य-डाॅ. रविन्द्र गर्ग एवं प्रशासनिक अधिकारी-डाॅ. नागेश डगांवकर का सक्रिय योगदान रहा। कार्यक्रम का संयोजन-डॉ. नेतराम कौरव, सहायक प्राध्यापक, भौतिकशास्त्र द्वारा किया गया तथा संचालन-डॉ. स्वाति मिश्रा एवं डॉ. फोजिया अजीज, सहायक प्राध्यापक, भौतिकी ने किया। आभार-डॉ. नमिता सिसौदिया, सह-प्राध्यापक, भौतिकशास्त्र द्वारा दिया गया। उक्त कार्यक्रम के सफल संचालन में डॉ. सुनील पाटीदार, डॉ. शिवराम शर्मा, डॉ. कोमल चैधरी, डॉ. बाबूलाल पांडे आदि सहायक प्राध्यापकों ने कार्यकम व्यवस्था में सहयोग दिया।